Tuesday, 21 October 2014

Latest Current Affairs

BJP won in Haryana and emerged as the largest party in Maharashtra, newsandviewsonline.com
Bharatiya Janta Party (BJP) won the state assembly elections of Haryana, which were held on 15 October 2014.  BJP by securing 47 seats emerged as the largest party, with clear majority.
  • Indian National Lok Dal (INLD ) won in  19 seats and Indian National Congress in 15 seats
  • The elections were held for total 90 seats on 15 October 2014
  • In Maharashtra BJP won in  122 seats and emerged as the largest party.
  • The elections were held on 15 October 2014 for total 288 seats.
Shiv Sena won in 63 seats, Indian National Congress : 42 seats and Nationalist Congress Party (NCP) : 41 seats.


Government has launched a new air quality index
Government has launched a new air quality index, newsandviewsonline.com
Government of India has launched a new air quality index to help citizens understand complex pollution data and its implications for their health.
  • The programme, to be implemented by the Central Pollution Control Board, will enable it to disseminate information on air quality in simple terms.
  • The national index will measure air pollution on eight parameters - PM10 (Particulate matter up to 10 micrometers in size), PM2.5, nitrogen dioxide, sulphur dioxide, carbon monoxide, ozone, ammonia and lead. All these pollutants will be measured for 24 hours.
  • According to Who United Nations agency, Air pollution killed about seven million people in 2012, making it the world's single biggest environmental health risk.

Saturday, 18 October 2014

राजस्थान के लोकदेवता

मारवाड़ के पंच वीर –

1. रामदेवजी

2. पाबूजी

3. हड़बूजी

4. मेहाजी मांगलिया

5. गोगाजी

1. रामदेवजी
  • उपनाम – रामसापीर, रूणेचा के धणी, बाबा रामदेव
  • जन्म – उडूकासमीर (बाड़मेर), 1405 ई. भादवा
  • पिता – अजमाल जी तँवर (रूणेचा के ठाकुर)
  • माता – मैणादे
  • पत्नी – नेतलदे
  • घोड़े का नाम – लीला इसीलिए इन्हें लाली रा असवार कहते हैं।
  • गुरू – बालीनाथ या बालकनाथ
  • विशेषताएँ – भैरव नामक राक्षस को मारा तथा पोकरण कस्बे को बसाया, कामडि़या पंथ की स्थापना की, अछूत मेघवाल जाति की डालीबाई को बहिन माना, मुस्लिम रामसापीर की तरह पूजते हैं।
  • नेजा – रामदेवजी के मन्दिर की पंचरंगी ध्वजा।
  • जम्मा – रामदेवजी का जागरण।
  • चैबीस बाणियाँ – रामदेवजी की रचना।
  • रिखिया – रामदेवजी के मेघवाल भक्त।
  • रूणेचा में रामदेवजी की समाधि पर प्रतिवर्ष भाद्र पद शुक्ला द्वितीया से एकादशी तक विशाल मेला भरता है। यह राजस्थान में साम्प्रदायिक सद्भाव का प्रतीक है। यहाँ कामड़ जाति की महिलाएँ तेरहताली का नृत्य करती है।
  • रामदेवजी के प्रमुख मन्दिर – रामदेवरा – जैसलमेर
  • बराडियाँ खुर्द – अजमेर
  • सुरताखेड़ा – चित्तौड़गढ
  • छोटा रामदेवरा – गुजरात
2. पाबूजी -
  • जन्म – कोलू (फलौरी, जोधपुर)
  • पिता का नाम – धांधलजी राठौड़
  • माता का नाम – कमलादे
  • पत्नी – सुप्यारदे
  • घोड़ी – केसर – कलमी
  • पाबू प्रकाश की रचना मोड़शी आशियां ने की।
  • लक्ष्मण का अवतार माने जाते हैं। देवल चारणी की गायों को छुड़ाने हेतु बहनोई जी दराव खींची से युद्ध किया।
  • ऊँटों के देवता, प्लेग रक्षक देवता के रूप में पूजे जाते हैं।
  • भाला लिए अश्वारोही के रूप में पूज्य/प्रतिवर्ष चैत्र अमावस्या को कोलू में मेला भरता है।
  • इनकी फड़ का वाचन भील जाति के नायक भोपे करते हैं|
3. गोगाजी
उपनाम – सपोर्ं के देवता, गोगा चव्हाण, गोगा बप्पा।
जन्म – ददरेवा (चूरू) में चौहान वंश में।
पिता – जेवर सिंह चौहान
माता – बादल दे।
पत्नी – केमलदे
  • मानसून की पहली वर्षा पर गोगा राखड़ी (नौ गांठो) को हल व किसान के बाँधा जाता है।
  • महमूद गजनवी के युद्ध किया तथा जाहिर पीर के रूप में प्रसिद्ध हुए।
  • समाधि गोगामेड़ी (शशिमेढी) नोहर तहसील हनुमानगढ़ में है। यहाँ भादप्रद कृष्ण नवमी (गोगानवमी) पर प्रतिवर्ष मेला भरता है।
  • ददरेवा (चूरू) में धडमेडी है।
  • समाधि पर बिसिमल्लाह एवं ओम अंकित है।
  • सवारी – नीली घोडी।
  • गोगाजी की लोल्डी (तीसरा मनिदर) साँचौर (जालौर) में है।
  • सर्प दंश पर इनकी पूजा की जाती है तथा तोरण (विवाह का) इनके थान पर चढ़ाया जाता है।
  • अपने मौसेरे भार्इयों अरजण व सुर्जन से गायों को छुड़ातें हुए वीरगति को प्राप्त हुए।
  • हड़बूजी – भूंडेल (नागौर) शासक मेहाजी साँखला के पुत्र थे।
  • राव जोधा के समकालीन थे।
  • बेगटी गाँव (फलौदी, जोधपुर) में इनका प्रमुख मंदिर है जहाँ इनकी गाड़ी की पूजा की जाती है।
  • रामदेवजी के मौसेरे भार्इ थे।
  • पुजारी – साँखला राजपूत
  • गुरू – बालीनाथ (बालकनाथ)
  • शकुन शास्त्र के ज्ञाता थे।
5. मेहाजी मांगलिया – मांगलिया राजपूतों के इष्ट देव।
प्रमुख मनिदर – वापिणी (ओसियाँ, जोधपुर) यहाँ प्रतिवर्ष भाद्रपद कृष्ण अष्टमी (जन्माष्टमी) को मेला भरता है।
घोडा – किरड़ काबरा।
जैसलमेर के राणंग देव भाटी से युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त।
इनकी पूजा करने वाले भोपों की वंश वृद्धि नहीं होती है। अत: वे वंश की वृद्धि गोद लेकर करते हैं।
6. तेजाजी – उपनाम – परम गौ रक्षक एवं गायों के मुकितदाता
कृषि कायोर्ं के उपकारक देवता, काला एवं बाला के देवता।
जन्म – खड़नाल (नागौर), जाट समुदाय में (नाग वंशीय)
पिता – ताहड़ जी जाट
माता – राजकुँवर
पत्नी – पेमल दे
लाíा व हीरा गूजरी की गायों को मेरों से छुडाते हुए संघर्ष में प्राणोत्सर्ग।
सुरसुरा (अजमेर) में इन्हें सर्पदंश हुआ था।
घोड़ी – लीलण।
पूजारी भोपे – घोड़ला कहे जाते हैं।
ब्यावर के तेजा चौक में प्रतिवर्ष भादवा सुदी दशमी को मेला भरता है।
राजस्थान का सबसे बड़ा पशु मेला वीर तेजाजी पशु मेला प्रतिवर्ष भाद्रपद शुक्ल दशमी से पूर्णिमा तक परबतसर (नागौर) में राज्य सरकार द्वारा आयोजित किया जाता है।
सर्वाधिक पूज्य – अजमेर जिले में।
7. देवनारायणजी
- उपनाम – देवजी, ऊदल जी।
जन्म का नाम – उदय सिंह
जन्म – गोठाँ दड़ावताँ (आसीन्द, भीलवाड़ा)
पिता – सवार्इ भोज (नागवंशीय गुर्जर बगड़ावत)
माता – सेडू खटाणी।
पत्नी – पीपलदे।
मूल मनिदर – आसीन्द में है। अन्य प्रमुख मनिदर – देवधाम जोधपुरिया (टोंक), देवमाली (अजमेर) तथा देव डूंगरी (चित्तौड़) ये चारों मनिदर चार धाम कहलाते हैं।
गुर्जरों के इष्ट देवता हैं। इनका मनिदर देवरा कहलाता है।
घोड़ा – लीलागर।
विष्णु के अवतार माने जाते हैं।
प्रमुख मेला प्रतिवर्ष भाद्रपद शुक्ल दशमी को देवधाम जोधपुरिया में भरता है।
8. मल्लीनाथ जी -
जन्म – मारवाड़ में (मालाणी परगने का नाम इन्हीं के नाम पर रखा गया।
माता – जाणी दे।
पिता – राव तीड़ा (मारवाड़ के शासक)
पत्नी – रूपा दें
ये निगर्ुण एवं निराकार र्इश्वर में विश्वास रखते थे।
प्रमुख मनिदर – तिलवाड़ा (बाड़मेर) में है। यहाँ चैत्र माह में मल्लीनाथ पशु मेला भरता है।
इन्होंने निजामुíीन को पराजित किया था।
9. तल्लीनाथ जी -
मारवाड़ के वीरमदेव राठौड़ के पुत्र थे। गुरू जालधंर नाथ ने तल्लीनाथ नाम दिया। मूल नाम – गाँगदेव राठौड़ था। जालौर के पाँचोड़ा गाँव में पंचमुख पहाड़ पर इनकी अश्वारोही मूर्ति है। यह क्षेत्र ओरण कहलाता है। यहाँ से कोर्इ भी पेड़-पौधे नहीं काटता। इन्हें प्रकृति प्रेमी देवता के रूप में पूजा जाता है। 10. वीर कल्लाजी – जन्म – मेड़ता परगने में। मीरा बार्इ के भतीजे थे।
केहर, कल्याण, कमधज, योगी, बाल ब्रह्राचारी तथा चार हाथों वाले देवता के रूप में पूज्य।
शेषनाग के अवतार माने जाते हैं।
अकबर से युद्ध किया था तथा वीरगति को प्राप्त।
गुरू – जालन्धरनाथ थे।
बाँसवाड़ा जिले में अत्यधिक मान्यता है।
इनकी सिद्ध पीठ – रानेला में हैं।
इन्हें जड़ी-बूटी द्वारा असाध्य रोगों के इलाज का ज्ञान था।
10. वीर बिग्गाजी -
जन्म – जांगल प्रदेश (वर्तमान बीकानेर)
पिता – राव महन
माता – सुल्तानी देवी
जाखड़ जाटों के लोकदेवता तथा कुल देवता।
मुसिलम लुटेरों से गौरक्षार्थ प्राणोत्सर्ग
11. देव बाबा -
मेवात (पूर्वी क्षेत्र) में ग्वालों के देवता के रूप में प्रसिद्ध।
पशु चिकित्सा शास्त्र में निपुण थे।
प्रमुख मनिदर – नंगला जहाज (भरतपुर) में भाद्रपद में तथा चैत्र में मेला।
12. हरिराम बाबा -
जन्म – झोरड़ा (नागौर), प्रमुख मनिदर भी यहीं हैं।
बजरंग बली के भक्त थे।
पिता – रामनारायण
माता – चनणी देवी
इनके मनिदर में साँप की बाम्बी की पूजा की जाती है।
14. झरड़ाजी (रूपनाथजी) -
पाबूजी के बड़े भार्इ बूढ़ोजी के पुत्र थे। इन्होंने अपने पिता व चाचा के हत्यारे खींची को मारा।
इन्हें हिमाचल प्रदेश में बाबा बालकनाथ के रूप में पूजा जाता है।
इनको रूपनाथ तथा बूढ़ो झरड़ा भी कहते हैं।
कोलू (जोधपुर) तथा सिंमूदड़ा (बीकानेर) में इनके मनिदर है।
15. मामाजी (मामादेव) -
राजस्थान में जब कोर्इ राजपूत योद्धा लोक कल्याणकारी कार्य हेतु वीरगति को प्राप्त होता था तो उस विशेष योद्धा (मामाजी) के रूप में पूजा जाता है।
पशिचम राज. में ऐसे अनेक मामाजी हैं जैसे – धोणेरी वीर, बाण्डी वाले मामाजी, सोनगरा मामाजी आदि।
इन्हें बरसात का देवता भी माना जाता है।
इनकी मूर्तियां जालौर के कुम्हार बनाते हैं, जिन्हें मामाजी के घोड़े कहते हैं।
16. भूरिया बाबा (गौतमेश्वर) -
राज्य के दक्षिण-पशिचम गोंडवाड क्षेत्र में मीणा जनजाति के आराध्य देव हैं। इनका मनिदर पोसालियां (सिरोही) में जवार्इ नदी के किनारे हैं।
17. बाबा झुँझार जी – जन्म – इमलोहा (सीकर) राजपूत परिवार में स्यालोदड़ा में रामनवमी पर मेला भरता है। मुसिलमों से गौरक्षार्थ बलिदान।
18. पनराज जी – जन्म – नगा (जैसलमेर) पनराजसर में मेला भरता है। गौरक्षार्थ बलिदान।
19. फत्ताजी – सांथू (जालौर) में जन्म। प्रतिवर्ष भाद्रपद शुक्ल नवमी को मेला।
20. इलोजी – होलिका के प्रेमी, मारवाड़ में अत्यधिक पूज्य। अविवाहित लोगों द्वारा पूजने पर विवाह हो जाता है।
21. आलमजी – बाड़मेर के मालाणी परगने में पूज्य। डागी नामक टीला आलमजी का धोरा कहलाता है। यहाँ भाद्रपद शुक्ल द्वितीया को मेला भरता है।
22. डूंगजी – जवारजी – शेखावाटी क्षेत्र के देशभक्त लोकदेवता।
23. भोमिया जी – भूमिरक्षक देवता के रूप में पूज्य।
24. केसरिया कुँवर जी – गोगाजी के पुत्र, सर्प देवता के रूप में पूज्य।

राजस्थान की लोकदेवियाँ

1. करणीमाता
मंदिर – देशनोक बीकानेर – बीकानेर राठौड़ शासकों की कुलदेवी, चारणीदेवी व चूहों की देवी के रूप में प्रसिद्ध, सफेद चूहे काला कहलाते हैं। जन्म का नाम रितू बाई विवाह – देवा के साथ, जन्म का स्थान सुआप (बीकानेर) बीकानेर राज्य की स्थापना इनके संकेत पर राव बीका द्वारा की गई। वर्तमान मंदिर का निर्माण महाराजा सूरज सिंह द्वारा।
2. जीणमाता
मंदिर व जन्म – रैवासी (सीकर) शेखावाटी क्षेत्र की प्रमुख देवी, चैहान राजपूतों की कुल देवी, ढाई प्याला मदीरा पान की प्रथार चैत्र व अश्विन माह में मेला, भाई – हर्ष, मंदिर का निर्माण पृथ्वीराज चैहान प्रथम के काल में।

3. कैला देवी:
त्रिकूट पर्वत पर, काली सिंध नदी के तट पर मंदिर, यदुवंशी राजवंश (करौली) की कुल देवी, मंदिर निर्माण गोपाल सिंह द्वारा। नरकासुर राक्षस का वध, चैत्र मास में शुक्ल अष्टमी को लख्ख्ी मेला, लागुरईथ गीत प्रसिद्ध।
4. शिला देवी:
मन्दिर आमेर में, अष्टभूजी महिषासुर मदरनी की मूर्ति, पूर्वी बंगाल विजय के उपरान्त आमेर शासक मानसिंह प्रथम द्वारा जससौर से लाकर स्थापित की गई। वर्तमान मंदिर का निर्माण मिर्जा राजा जयसिंह द्वारा कछवाहा वंश की कुल देवी, इच्छानुसार मदिरा व जल का चरणामृत चढ़ाया जाता है।
5. लट्टीयाल माता: फलौदी (जोधपुर में)
6. त्रिकूट सुन्दरी मंदिर:
 तिलवाड़ा (बांसवाड़ा) में मन्दिर, उपनाम तरताई माता, निर्माण – सम्राट कनिष्क के काल में पांचालों की कुल देवी, आठों में अठारह प्रकार के अस्त्र-शस्त्र।
7. दधीमती माता: 
मंदिर गोठ मांगलोद (नागौर) में, पुराणों के अनुसार इन्होंने विकटासुर राक्षस का वध किया था। उदयपुर महाराणा को इन्हीं के आर्शीवादों से पुत्र प्राप्ति हुई थी। यह दाधीच ब्राह्मणों की कुल देवी है।
8. चारण देवी (आवण माता): 
मंदिर तेमडेराय (जैसलमेर) में जैसलमेर के मामड़राज जी के यहाँ हिंगलाज माता की वंशावतार 7 कन्या हुई थी जिन्होंने संयुक्त रूप से चारण देवियाँ कहा जाता है। इनकी संयुक्त प्रतिमा डाला तथा स्तुति चर्जा कहलाती है। चर्जा दो प्रकार की होती है।
सिंगाऊ – शांति के समय की जाने वाली स्तुति।
घडाऊ – विपति के समय की जाने वाली स्तुति।
9. सुगाली माता: 
आऊवा (पाली) में मंदिर। कुशाल सिंह चंपावत की कुल देवी, इनके 10 सिर से 54 भुजायें है। 1857 की क्रांति में इसकी मूर्ति को अंग्रेजो द्वारा अजमेर लाया गया था।
10. नागणेचिया माता: 
नागेणा (बाड़मेर) में, निर्माण रावदुहण द्वारा 13वीं शताब्दी में, राठौड़ वंश की कुल देवी, राठौड़ वृक्ष मीन के वृक्ष को न काटता है, न ही उपयोग करता है।
11. ढाढ माता: कोटा में पोलियो की देवी।
12. तणोटिया माता: 
तनोट (जैसलमेर) सेना की रक्षा करे, पर सैनिकों की आराध्य देवी मानी जाती है।
13. आमजा माता: मंदिर रीछड़ा (उदयपुर) में, भीलों की देवी, प्रतिवर्ष ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी को मेला।
14. बाण माता: कुम्भलगढ़ किले के पास, केलवाड़ा में मंदिर, मेवाड़ शासकों की कुल देवी।
15. महामाया: शिशु रक्षक देवी, मंदिर मावली उदयपुर में गर्भवती स्त्रियों द्वारा पूजा।
16. कालिका माता: मंदिर पद्मिनी महल, चित्तौड़गढ़ दुर्ग, निर्माण मानमौ द्वारा 8वीं शताब्दी में, गोहिल वंश (गहलोतों) की कुल देवी।
17. कुशला माता: 
मंदिर बदनौर (भीलवाड़ा) में, निर्माण – महाराणा कुम्भा द्वारा, इसी के पास बैराठ माता का मंदिर है। ये दोनों बहनें मानी जाती है तथा चामुण्ड माता का अवतार है।
18. ज्वाला माता: मंदिर जोबनेर (जयपुर में) जेत्रसिंह ने इनके आशीर्वाद से लाल वेग की सेना को हराया था।
19. चामुण्डा देवी: मंदिर अजमेर, निर्माण पृथ्वीराज चैहान द्वारा चैहानों की कुल देवी, चारण भाट चन्दरबरदाई की इष्ट देवी।
20. बडली माता: छीपों के आकोला (चित्तौड़गढ़) बेडच नदी के किनारे, बीमार बच्चों को मंदिर की दो तिबारी से निकाला जाता है।
21. आशापुरा माता: 
उपनाम – आक्षापुरा, मंदिर – पोकरण (जैसलमेर) बिस्सा जाति की कुल देवी, मनोकामना पूर्व करने वाली देवी, माता के मेहन्दी नहीं लगाई जाती है।
22. स्वांगीया माता: मंदिर गजरूपसागर (जैसलमेर) में, यादव भाटी वंश की कुल देवी, राजकीय प्रतिचिन्ह पालमचिड़ी व स्वांग (मुडाहुआ)।
23. तुलजा भवानी: चित्तौड़ दुर्ग में प्राचीन माता मंदिर, छत्रपति शिवाजी की आराध्य देवी।
24. जल देवी: बावडी (टांेक) में स्थित।
25. छींक माता: जयपुर
26. हिचकी माता: सनवाड़ (उदयपुर)
27. जिलाजी माता: बहरोड़ (अलवर) हिन्दूओं को मुस्लिम बनने से रोकने के लिए माता रूप में प्रसिद्ध।
28. आवरी माता: निकुम्भ (चित्तौड़गढ़) में मन्दिर, लूले लंगड़े लखवाग्रस्त लोगों का ईलाज।
29. भदाणा माता: कोटा में, मूठ की पकड़ में आये व्यक्ति में इलाज के लिए।
30. शीतला माता: 
मंदिर चाकसू (जयपुर) में शील डूंगरी पर, निर्माण सवाई माधोसिंह द्वारा, उपनाम मातृरक्षा तथा चेचक की देवी। पूजारी कुम्हार, वाहन गंधा। प्रतिवर्ष शीतलाष्टमी पर गर्धभ मेला। सर्वप्रथम चढ़ावा – जयपुर दरबार द्वारा। शीतलाष्टमी – चैत्र शुक्ल अष्ठमी।
31. संकराय माता: 
मंदिर उदयपुरवाटी (झुन्झूनु) में, खण्डेलवाल जाति की कुल देवी, उपनाम – शाक्मभरी, शंकरा। अकाल पीडि़त जनता की रक्षा के लिए।
32. सच्चिया माता: 
मंदिर ओसिया (जोधपुर) में। ओसवालों की कुल देवी, निर्माण परमार शासक उपलदेव द्वारा। महिषासुर मदरनी का सात्विक रूप।
33. नारायणी माता: 
मंदिर अलवर, नाईयों की कुल देवी, मूलणाम करमीती। मंदिर प्रतिहार शैली का बना हुआ बरवा डूंगरी पर स्थित है। पुजारी – मीणा जाति।
34. राणी सती: मंदिर – झून्झूनु, मूल नाम – नारायणी बाई, दादी जी नाम प्रसिद्ध, परिवार में कुल 13 सतियां हुई।
35. आई माता: मंदिर – 
बिलाड़ा जोधपुर, सिखी कृषक राजपूतों की कुल देवी, मंदिर – दरगाह थान बड़ेर कहलाता है। मंदिर बिना मूर्ति का है जहाँ दीपक की ज्योति से केसर टपकता है जिसका उपयोग इलाज में किया जाता है।
37. घेवर माता: राजसमन्द झील की पाल पर सती हुई|

राजस्‍थान सामान्‍य ज्ञान

1 राजस्‍थान का प्रवेश द्वार किसे कहा जाता है

भरतपुर
2 महुआ के पेङ पाये जाते है
अदयपुर व चितैङगढ
3 राजस्‍थान में छप्‍पनिया अकाल किस वर्ष पङा
1956 वि स
4 राजस्‍थान में मानसून वर्षा किस दिशा मे बढती है
दक्षिण पश्चिम से उत्‍तर पूर्व
5 राजस्‍थान में गुरू शिखर चोटी की उचाई कितनी है
1722 मीटर
6 राजस्‍थान में किस शहर को सन सिटी के नाम से जाना जाता है
जोधपुर को
7 राजस्‍थान की आकति है
विषमकोण चतुर्भुज
8 राजस्‍थान के किस जिले का क्षेत्रफल सबसे ज्‍यादा है
जैसलमेर
9 राज्‍य की कुल स्‍थलीय सीमा की लम्‍बाई है
5920 किमी
10 राजस्‍थान का सबसे पूर्वी जिला है
धौलपुर
11 राजस्‍थान का सागवान कौनसा वक्ष कहलाता है
रोहिङा
12 राजस्‍थान के किसा क्षेत्र में सागौन के वन पाये जाते है
दक्षिणी
13 जून माह में सूर्य किस जिले में लम्‍बत चमकता है
बॉसवाङा
14 राजस्‍थान में पूर्ण मरूस्‍थल वाले जिलें हैंा
जैसलमेर, बाडमेर
15 राजस्‍‍थान के कौनसे भाग में सर्वाधिक वर्षा होती है
दक्षिणी-पूर्वी
16 राजस्‍थान में सर्वाधिक तहसीलों की संख्‍या किस जिले में है
जयपुर
17 राजस्‍थान में सर्वप्रथम सूर्योदय किस जिले में होता है
धौलपुर
18 उङिया पठार किस जिले में स्थित है
सिरोही
19 राजस्‍थान में किन वनों का अभाव है
शंकुधारी वन
20 राजस्‍थान के क्षेत्रफल का कितना भू-भाग रेगिस्‍तानी है
लगभग दो-तिहाई
21 राजस्‍थान के पश्चिम भाग में पाये जाने वाला सर्वाधिक विषैला सर्प
पीवणा सर्प
22 राजस्‍थान के पूर्णतया वनस्‍पति रहित क्षेत्र
समगॉव (जैसलमेर)
23 राजस्‍थान के किस जिले में सूर्य किरणों का तिरछापन सर्वाधिक होता है
श्रीगंगानगर
24 राजस्‍थान का क्षेतफल इजरायल से कितना गुना है
17 गुना बङा है
25 राजस्‍थान की 1070 किमी लम्‍बी पाकिस्‍तान से लगी सिमा रेखा का नाम
रेडक्लिफ रेखा
26 कर्क रेखा राजस्‍थान के किस जिले से छूती हुई गुजरती है
डूंगरपुर व बॉसवाङा से होकर
27 राजस्‍थान में जनसंख्‍या की द़ष्टि से सबसे बङा जिला
जयपुर
28 थार के रेगिस्‍तान के कुल क्षेत्रफल का कितना प्रतिशत राजस्‍थान में है
58 प्रतिशत
29 राजस्‍थान के रेगिस्‍तान में रेत के विशाल लहरदार टीले को क्‍या कहते है
धोरे
30 राजस्‍थान का एकमात्र जीवाश्‍म पार्क स्थित है
आकलगॉव (जैसलमेर)
धार्मिक विश्‍वास, सम्‍परदाय, संत, कवि, लोक देवता एंव लोक देवियां

1    राजस्‍थान में लोक देवता और संतों की जन्‍म एवं कर्म स्‍थली के लिए प्रसिध्‍द है
   – नागौर
    > नागौर की वीर और भक्ति रस के संगम स्‍थल के रूप में भी जाना जाता है
2    तेजाजी का विवाह कहां के नरेश की पुत्री से हुआ था
   -पनेर (अजमेर)
> तेजाजी का विवाह पनेर नरेश रामचन्‍द की पुत्री पैमल से हुआ था
3    लोक देवता की राज्‍य क्रांति का जनक माना जाता है
देवनारायण जी
    >देवमाली-आसींद के पास देवनारायण का प्रमुख तीर्थ स्‍थल है
4    चौबीस बाणियां किस लोकदेवता से संवंधित पुस्‍तक/ग्रन्‍थ है
-रामदेवजी
>रामदेवजी का वाहन नीला घोङा था, रामदेवरा में रामदेवजी का मेला लगता है
5    संत रैदास किसके शिष्‍य थे
संत रामानन्‍द जी के
>संत रैदास मीरां के गुरू थे
6    कौन से संत राजस्‍थान के न्रसिंह के नाम से जाने जाते हे
-भक्‍त कवि दुर्लभ जी
> कवि बागङ क्षेत्र के संत है
7    संत रज्‍जनबजी की प्रधान गद्दी है
सांगानेर में
>संत रज्‍जबती भी संत दादूजी के शिष्‍य थे, जीवन भर दूल्‍हे के वेश में रहने वाले संत रज्‍जब ही थे
8    लोक संत पीपाली की गुफा किस जिले में है
-झालावाङ में
>राजस्‍थान के लोक संत पीपाजी का विशाल मेला समदङी ग्राम में लगता है
9    मेव जाति से संबंध वाले संत है
लालदासजी
>लालदास जी सम्‍प्रदाय के प्रवर्तक लालदास जी ही है
10    भौमिया जी को किस रूम में जाना जाता है
-भूमि के रक्षक 
    >संत धन्‍ना राजस्‍थान में टोंक जिले के धुवन में हुआ था
11    राजस्‍थान में बरसात का लोक देवता निम्‍नलिखित में से किस देवता को माना जाता है
-मामा देव
    >मांगलियों के इष्‍ट देवत मेहाजी है,
12    संत जसनाथजी का जन्‍म किस जिले में हुआ था
-बीकानेर
>जसनाथी सम्‍प्रदाय के कुल 36 नियम है
13    दादूपंथी सम्‍प्रदाय की प्रमुख गद्दी स्थित है
-नरैना (जयपुर) में
>दादूदयाल का जन्‍म गुजरात में हुआ था
14    किस लोक देवता कामङिया पंथ की स्‍थापना की थी
बाबा रामदेवजी ने
> रामदेवजी जाति प्रथा का विराध करते थे, बाबा रामदेव का जन्‍म बाङमेर जिले की शिव तहसील में उण्‍डू -कश्‍मीर गांव में हुआ था
15    किस लोक देवता को जाहिर पीर के नाम से जाना जाता है
-गोगाजी को
    >गोगाजी को मुस्ल्मि सम्‍प्रदाय के लोग गोगा पीर कहते है, इन्‍हें राजस्‍थान में पंचपीरों में गिना जाता है, गोगामेङी हनुमानगढ मेला भरता है
16    वीर बग्‍गाजी का जन्‍म किस जिले में हुआ था
-बीकानेर में
>बीर बग्‍गाजी का जन्‍म बीकानेर जिले के जांगलू गांव में हुआ था
17    आलमजी की राजस्‍थान के किस में लोकदेवता के रूप में पूजा जाता है
-बाङमेर में
> आलमजी को बाङमेर जिले के मालाणी प्रदेश में राङधरा क्षेत्र में लोक देवता के रूप में पूजा जाता है
18    जाम्‍भेजी लोक देवता का प्रसिध्‍द स्‍थान कौनसा है
-संभारथाल बीकानरे
19    रामदेवजी लोक देवता का प्रसिध्‍द स्‍थान कौनसा है
-खेङापा जोधपुर
20    गोगाजी लोक देवता का प्रसिध्‍द स्‍थाल कौनसा है
-गोगामेङी हनुमानगढ